Sunday, 31 January 2016

जे बात




  

आज यह विडिओ क्लिप मेरे व्हाट्सएप्प आया। इस विडिओ के शुरूआती दृश्य में जो दिखाया वह एक सामान्य सी घटना लगती है लेकिन क्लिप के दूसरे हिस्से जब लड़की तिरंगा नीचे फेकती है और उसके बाद उस लड़के की प्रतिक्रिया अपेक्षित थी परन्तु इस स्तर पर नहीं।

मै नहीं जानता लड़के ने उस लड़की  को क्या  कहा क्योकि मै उस भाषा से परिचित नहीं हूँ, जो भी भाव रहा जो प्रतिक्रिया दी गई, वह देख कर अच्छा लगा। हालांकि ये बात देखने में जितनी छोटी लगती है लेकिन भावना और विचारों के स्तर पर उतनी ही बड़ी है।

तिरंगे का अपमान कौन कर रहा है यह मायने नहीं रखता लेकिन जो करता है। उसका विरोध होना ही चाहिए। चाहे वो डीएम हो, सीएम हो या पीएम ही क्यों न हो।

वर्दी पहनने से कोई सिपाही नहीं बनता। हर वह व्यक्ति सिपाही है इस देश का, जो इसका अपमान करने वालो को रोक सके और ठोक भी सके लेकिन हिंसा किये बिना। 

देश प्रेम का अर्थ केवल गोली खाना नहीं है या ऐसा भी नहीं है कि आप सीमा पर जा कर लड़े। देशहित में किया गया हर कार्य  देशभक्ति है। हमे देश सेवा के लिए बड़े काम करने है ऐसा भी नहीं है। बड़े काम बड़े लोगो के लिए छोड़ दीजिये। मुझे लगता है कि हमे छोटा कार्य करना चाहिए। वह कार्य अपने आप बड़ा हो जाएगा। याद रखिये बड़े कार्य हम दुसरो के लिए रखना चाहिए। हमे तो अपने छोटे कार्य में लगे रहना चाहये। 

आपके छोटे-छोटे कार्य ही देश को स्वच्छ, समृद्ध, और प्रगति की ओर ले जाएंगे। 

Friday, 22 January 2016

भारत से बहरीन में मात खाया पाकिस्तान और चीन का गठजोड़।



आपको बता दे बहरीन में इंटरनेशनल एयर शो का आयोजन शुरू हुआ है जो 21 जनवरी से 23 जनवरी तक चलेगा। इसमें दुनिआ के कई देश अपने लड़ाकू जहाजो का प्रदर्शन करने जा रहे है। इसमें भारत ने भी अपने यंहा निर्मित तेजस को वहां भेजा है। इसका फैसला प्रधानमंत्री कार्यलय स्तर पर लिया गया था। जिसमे खास तौर पर तेजस का मुकाबला पाकिस्तान और चीन के सयुंक्त रूप से विकसित लड़ाकू जहाज जेअफ-17 से था लेकिन मुकाबला होने से पहले ही पाकिस्तान ने इस एयर शो से अपना नाम वापस ले लिया है। यानि मुकाबले ने उतरने से पहले है तेजस ने जेअफ- 17 को मात दे दी है। 
हलाकि दोनों अपने जहाज अपने स्तर पर काफी अच्छे है फिर भी तेजस कई बिन्दुओ में जेएफ-17 को मात देता है। आइये जानते है इनकी विशेताए । 

Wednesday, 20 January 2016

हैदराबाद के रोहित वेमुला का एक सच ये भी



रोहित वेमुला हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी से पीएचडी कर रहा था। वह यूनिवर्सिटी से 2012 में जुड़ा और कॉउंसिल फॉर साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च से जूनियर रिसर्च फ़ेलोशिप प्राप्त की। हर महीने रोहित को 25000 छात्रव्रती के रूप में मिलते थे। वह एक विज्ञान का लेखक बनना चाहता था। रोहित अम्बेडकर स्टूडेंट असोसिएशन से जुड़ा हुआ था। उसके पिता सिक्योरिटी गॉर्ड है एक निजी अस्पताल में और माता सिलाई का काम करती है। रोहित की एक बड़ी बहन है और एक छोटा भाई है। यह तो हुआ रोहित वेमुला का छोटा सा परिचय।

रोहित और एबीवीपी का विवाद:-    


Saturday, 16 January 2016

कब तक उड़ाएगे शांति के कबूतर ?


 हाल ही में ग्लोबल टाइम्स न्यूज़ पेपर ने चीन में एक ऑनलाइन सर्वे किया जिसमें तीन सवाल पूछे गए थे। पहला सवाल था- आपका पडोसी देश किस तरह का होना चाहिए ? दूसरा, किस देश को आप अपने देश के साथ नहीं रखना चाहते ? तीसरा, किस देश को चीन के साथ रखना चाहते हो? इस वोटिंग प्रक्रिया में 20 हजार लोगों ने हिस्सा लिया। आप को जान कर हैरानी होगी कि दस हजार चार सौ सोलह लोगों ने भारत को सिरे से नकार दिया। इस परिणाम से साबित होता है कि भारत को चीन के आधे से ज्यादा लोगो ने ठुकरा दिया जबकि पाकिस्तान को चीनियों ने भारत से ज्यादा पसंद किया। भारत शांतिप्रिय होते हुए भी ना पसंद किया गया। 

भारत ने अपने 5000 हज़ार साल के इतिहास में किसी भी देश पर हमला नहीं किया। ताकतवर और सम्पन्न होने के बाद भी किसी को दबाया नहीं। जब अमेरिका जैसे देशों के लोग नंगे घुमा करते थे, उस समय भारत उत्तम कोटि के वस्त्र निर्यात करता था। हम अगर 1947 से लेकर आज तक का इतिहास उठा कर देखे तो भारत ने हमेशा शांति और सिद्धांतो की न केवल बात की है बल्कि उसे अपने व्यवहार से भी साबित किया है। 1948 में पाकिस्तान ने पीओके पर जबरन कब्ज़ा कर लिया। उसका 5180 sqkm हिस्सा 1963 में चीन को दे दिया जो आज अक्साई चीन के नाम से जाना जाता है। 
आपके सामने चीन का उदारण है जो 1937 में क्या था ? और आज क्या है ? और भारत की भौगोलिक स्थिति आज सबके सामने है। 


Friday, 15 January 2016

कुछ तो सचाई है मेरी बातो में, के कुछ लोग कहते है मै इंसा बुरा हूँ



कुछ तो सचाई है मेरी बातो में, 
के कुछ लोग कहते है मै इंसा बुरा हूँ,

जिन्होंने जख्म दिए इस गुलिस्ता को,
 वही हर फूल पर आंसू बहाते है,

जो जिये दिखावे की जिन्दगी उम्र भर,
 वही हमे आइना दिखाते है,

जिन्हें फर्क नहीं मालूम धर्म और पंथ का,
 वही अक्सर चिराग लिए पथ दिखाते है,

छोड़ दी है इंसानियत हैवानो के हाथ में, 
और अक्सर पत्थर लोग इंसानों पर उठाते है,

बदल ली समाज ने अपनी दिशा, 
के जो चोर थे वही रक्षक बन जाते है।।


Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।


Read Also:- तिरंगा गाल पर लगाने वालो , एक आंसू शहीदो पर भी बहालो

तिरंगा गाल पर लगाने वालो , एक आंसू शहीदो पर भी बहालो





कुछ दिन पहले पठानकोट में आतंकवादी घटना हुई थी। उस समय हमारे देश के सात वीर जवान आतंकवादियो से लोहा लेते हुए शहीद हो गए। बहुत लोगो ने फेसबुक के माद्यम से या अन्य सोशल मीडिया साइट से अपनी श्रद्धांजलि प्रकट की लेकिन कुछ लोगो के लिए देशप्रेम का अर्थ होता है सिर्फ क्रिकेट में अपने चेहरे पर तिरंगा लगाना। उनको इस कविता के माद्यम से कुछ कहना चाहता हूँ। 


तिरंगा गाल पर लगाने वालो, 
एक आंसू शहीदो पर भी बहालो,

कुर्बान कर दी जिसने तमाम हसरते दिल की, तिरंगे के लिए,
कभी उसी जज्बे से तिरंगे को, अपने माथे से लगालो,

देश भक्ति कोई खेल नहीं है, 
ये भावनाओ की गहराई है, उचाई है,
इसे समझने के लिए भी थोडा वक़्त निकालो, 
क्यों मर जाता है कोई, सिर्फ तीन रंग के लिए,

इन मौलानाओ से कह दो
 पहले अपने मनो से कट्टरता हटा लो,
अब कुछ कहते है, हम राष्ट्र-गान नहीं गाएगे, 
 कह दो उनसे अपनी आँखों से धर्म का चस्मा हटा लो,
छोड़ दो ये मुल्क अगर नहीं होता तुमसे, 
जहाँ मिले तुमे अपनी आज़ादी, वहीँ अपना आंशिया बसालो।। 




Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।


Saturday, 9 January 2016

आईएनएस कदमत्त करेगा दुश्मनो का खात्मा


आईएनएस कदमत्त को 7 जनवरी 2016 को विशाखापटनम के नेवल डाकयार्ड में, नेवी प्रमुख आर. के. धोवन ने देश को समर्पित किया। इसका नाम भारत के कदमत्त द्वीप के नाम पर रखा गया है। इसका निर्माण गार्डन रीच शिपबिल्डर एंड इंजीनियर्स ऑफ़ कोलकत्ता ने किया है। आईएनएस कदमत्त पूर्वी नेवल कमांड के अंतर्गत अपनी सेवाए देगा। 

आईएनएस कदमत्त किसी भी पनडुब्बी के वॉर को रोकने में सक्षम है। इसका वजन 3000 टन है और यह 45 किलोमीटर की रफ़्तार से चल सकता है। यह एक बार में 5550 किलोमीटर की दुरी तय कर सकता है। इसमें इस एक खास तरह की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है जिससे दुश्मनो को इसे ढूढ़ना मुश्किल होगा। यह खास तौर पर पनडुब्बी को नष्ट करने के लिए ही बनाया गया है। इस पर एक हेलीकाप्टर को भी रखा जा सकता है जो इसकी पहुंच को और बढ़ा देता है। 

Friday, 8 January 2016

मालदा पार्ट-2



रविवार को मालदा में जिस प्रकार हिंसा हुई। उसी प्रकार की हिंसा अब बिहार के पूर्णिया जिले में देखने को मिली।  हज़ारो की संख्या में मुस्लिम सडको पर उतर आये कहते है इनकी संख्या लगभग 30 -40 हज़ार थी। पैगम्बर मोहम्मद पर की गई टिप्पणी के विरोध मे जुलुस निकाला गया था। जुलुस निकाल ने की अनुमति इस्लामिक कौंसिल ने ली थी। जुलुस ख़त्म होने पर भीड़ उग्र हो गई और उसने बाइसी थाने में थोड़ फोड़ की तथा उसे आग लगा दी। उसके कंप्यूटर, फर्नीचर और अन्य अहम दस्तावेज भी जल कर राख हो गए। 

पुलिस वालो ने थाने  से भागकर जान बचाई। उसके बाद जब भारी पुलिस बल आया तब जाकर ये हिंसा शांत हुई। लेकिन इतना सबकुछ हो जाने पर भी अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई। हैरान करने वाली बात यह है कि अब कोई न्यूज़ चेंनेल और बुद्धिजीवी और हमारे देश के नेता इस पर ब्यान देने से बच रहे है। ये सब खुले आम हो रहा है पर कोई भी इसके खिलाफ बोलने के लिए तैयार नहीं है। 

अब दिल्ली के मुख्यमंत्री जो दिल्ली छोड़ के दादरी पहुंच गए थे और वंहा जाकर घड़ियाली आंसू बहा रहे थे और दादरी घटना के लिए दिल्ली सरकार की तरफ से विज्ञापन भी चलाया था। अब इस विषय पर क्या दिल्ली से बाहर किसी भी विषय पर बोलने के लिए तैयार नहीं है। 

राजनीती का इससे बुरा काल कभी नहीं आया होगा जब नेता लोग खुले आम अपने गिरगिट होने की काभिलियत को बखूबी साबित कर रहे है। 

Read Also:- मदरसे में राष्ट्र-गान गाने पर हेड मास्टर की पिटाई

Thursday, 7 January 2016

मदरसे में राष्ट्र-गान गाने पर हेड मास्टर की पिटाई



आप लोगो ने कही बार देखा होगा लोग बड़ी बहदुरी से अपने धर्म के लिए आवाज़ उठाते हुए लोग जुलुस निकालते है, हिंसक प्रदर्शन करते है। पुरे देश-प्रदेश की कानून व्यवस्था को अपने हाथ में ले लेते है। बुद्धिजीवी भी अपने बिलो से बहार निकल कर पक्ष-विपक्ष में झंडे बुलंद कर लेते है और आज कल नए बुद्धिजीवी पैदा हो रहे है बॉलीवुड में वो भी खड़े हो जाते है धर्म के नाम पर लेकिन जब देश की बात आती है तो सबके सब पड़े होते है अपने बिलो में। 

अभी हाल ही में पश्चिमी- बंगाल की घटना सामने आई जिसमे एक मदरसे का हेड मास्टर को सिर्फ इसलिए मारा गया क्योकि उसने मदरसे के बच्चो को राष्ट्र-गान का अभ्यास कराया। उसकी मदरसे में जाने पर पाबन्दी लगा दी। काजी मासूम अख्तर ने अपने मदरसे तालपुकुर में आधुनिक शिक्षा की शुरुआत की तो कुछ कटटर पंथियों ने इसका विरोध किया। जब वह नहीं माने तो उनकी पिटाई की गई। इसकी जानकारी उन्होंने पुलिस को दी लेकिन कोई कार्यवाही नहीं हुई, फिर क़ाज़ी मासूम अख्तर ने मदरसे बोर्ड को इसकी जानकारी दी पर कुछ नहीं हुआ। उसके बाद उन्होंने पश्चिमी-बंगाल की मुख्यमंत्री को इसके बारे में 6 बार पात्र लिखा पर कोई उत्तर मुख्यमंत्री की तरफ से नहीं आया। चारो तरफ से निराश होकर क़ाज़ी मासूम ने मीडिया को इसमें सम्लित किया। तब जाकर यह घटना प्रकाश में आई । 

अब सवाल उठता है कि राष्ट्र-गान गाने पर किसे आपत्ति है ? यह वैसे बताने की आवश्यकता नहीं है। जिन्हे राष्ट्र-गान से गाने से उनका धर्म रोकता है। मै उन्हें सलाह देता हूँ कि आप किसी भी इस्लामिक देश जाने के लिए स्वतंत्र है क्योकि यह देश एक पंथनिरपेक्ष देश है कोई इस्लामिक देश नहीं है। 

यह भी विचारणीय विषय है कि  ऐसा क्यो  है की जन्हा भी मुस्लिम आबादी बढ़ती है वंहा पर देश विरोधी ताकते मजबूत होती है और गैर इस्लामिक लोगो का रहना मुस्किल हो जाता है। 
एक टीवी चेनेल की डिबेट में गरीब नवाज़ फाउंडेशन के हेड अंसार रजा खान कुल आम कहते है कि वह राष्ट्र-गान की भारत-भाग्य-विधाता पंक्ति नहीं गाएगे। कहा से आती है इनमे इतनी ताक़त ये सब खुला आम बोलने की। 
एक अन्य क़ाज़ी ने न्यूज़ चेंनेल पर सरे आम न्यूज़ एंकर को सर काटने की धमकी दे दी पर कोई कार्यवाही नहीं हुई और नहीं किसी बुद्धिजीवी  अपने बिल से बहार निकला। 

अगर देश को बचाना है तो इन देश विरोधी ताक़तों को जल्द से जल्द ख़त्म करने के लिए सरकार को ठोस कार्यवाही करनी चाहिए।   

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Wednesday, 6 January 2016

क्यों चुप है सभी लोग मालदा हिंसा पर ?



पश्चिमी बंगाल के मालदा जिले में लगभग 2.5  लाख मुस्लिम सड़को पर निकल आये कमलेश तिवारी के विरोध में और उसकी  फांसी की सजा की मांग कर रहे थे। कमलेश तिवारी जो अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष है। यह संस्था उत्तर- प्रदेश में पंजीकरित है। कमलेश तिवारी का यह ब्यान आजम खान के ब्यान की प्रतिक्रिया के रूप में आया था। जिसमे आजम खान ने आरएसएस के स्वयंसेवको को "गे" कहा था। उसी लहज़े में मुस्लिमो के पैगम्बर को भी समलैगिक कह दिया। कमलेश तिवारी को उसके ब्यान के एक दिन बाद ही जेल में डाल दिया गया तो सवाल यह उठता है कि लगभग एक महीने बाद इस रैली का क्या ओचित्य था। इतने बड़े पैमाने पर होना इस बात की और संकेत करता है की कही न कही इसकी तैयारी बहुत पहले से थी। 


                 

पश्चिमी-बंगाल में यह घटना इतने बड़े पैमाने पर हुई। गाड़िया जला दी गई, पुलिश स्टेशन पर हमला किया गया और उसे भी जला दिया गया, बीएसएफ  की गाड़ी आ रही थी उस पर भी हमला कर उसे भी जला दिया गया। पुलिश वाले हो या बीएसएफ सभी को अपनी जान भागकर बचानी पड़ी। एक यात्री बस पर भी हमला किया गया उनको भी अपनी जान बचा कर भागना पड़ा। कुछ लोग हथियार के साथ फायरिंग कर रहे थे। यह सब होता रहा लेकिन प्रसाशन सोता रहा। इस दौरान 30 लोग घायल हो गए और सरकारी और गैरसरकारी सम्पत्ती का नुकसान हुआ। 

 अब सवाल उठता है इतना सब होने पर भी कि किसी भी न्यूज़ चैनल पर इसकी डिबेट नही हुई। किसी भी चैनल पर खबर तक नहीं दिखाई दी लेकिन मै बधाई देना चाहता हूँ ज़ी न्यूज़ को जिसने सबसे पहले इस खबर को दिखाया और इसे दबने से बचा लिया गया। इसी कड़ी में  एबीपी न्यूज़ चेंनेल भी शामिल हो गया। 
हैरानी की बात है किसी भी बुद्धिजीवी की कोई आवाज़ इस घटना पर सुनाई नहीं दी। बॉलीवुड के किसी भी सितारे को इस घटना में अशहिस्णुता दिखाई नहीं देती। 

कुछ दिनों पहले कुरैशी शाहब जो ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य है, ने कहा था की श्री राम अयोध्या में नहीं पाकिस्तान और अफगानिस्तान सीमा पर पैदा हुए है। इस तरह की घटिया और असंवेदनशील बयान देने के बाद भी किसी हिन्दू संघठनो ने देश में तोड़ फोड़ नहीं की और नहीं कुरैशी को गिरफ्तार किया। अब आप क्या कहेंगे इस दोहरे रवैये के बारे में ?  ऐसी एक घटना नहीं है दौरे मापदंड की अनेक है इसलिए अब समय आ गया है कि सरकार एक देश, एक झंडा , एक कानून पर जल्द से जल्द काम करे।