Thursday, 4 August 2016

पाकिस्तान के यार देश के गद्दार



हाल ही में हुए जम्मू-कश्मीर के चुनाव में 'पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी'  की नेता महबूबा मुफ़्ती के खिलाफ खड़े हुए, नेशनल कांफ्रेंस के नेता इफ्तिखार हुसैन मिसगर ने मुख्यधारा की राजनीती को अलविदा कह दिया और भारत विरोधी नारो का समर्थन किया जो उनके निवास स्थान के बाहर लग रहे थे। 

मिसगर ऐसे पहले राजनीतिज्ञ बन गए है जिसने मुख्यधारा की राजनीती को अलविदा कह दिया है। उनका त्यागपत्र तब आया जब हुर्रियत कांफ्रेंस ने सभी भारत समर्थक राजनितिक पार्टियों का सामाजिक बहिष्कार का आहवान किया था। मिसगर ने कहा-"मुझे कोई सुरक्षा नहीं चाहिए, मुझे मेरे लोगो की सुरक्षा चाहिए।"  ये उसने अनन्तनाग में लोगो को सम्बोद्वित करते हुए कहा।

उसने भारत विरोधी नारे लगाते हुए कहा- " भारत के आवानु में आग लगा दो आग लगा दो " 
ऐसा ही एक नारा और दिया गया " भारत का जो यार है गद्दार है गद्दार है।" 
इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के मुताबिक मिसगर से बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई लेकिन बात नहीं सकी। पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी का गढ़ माने जाने वाला अनंतनाग में प्रदर्शन के दौरान 8 जुलाई से अब तक 20 से ज्यादा लोग मारे गए जबकि 559 घायल हो गए। 

Tuesday, 2 August 2016

तमाम उम्र गवा दी नाराजगी में



तमाम उम्र गवा दी नाराजगी में ,
जिनसें नाराज हुए, उन्हें इल्म तक नही ,

बहुत छोटी है जिंदगी इन बातो के लिये 
कुछ तुम चलो, कुछ हम चले,

संवाद न हो तो कोई बात नही 
बैठ पास कुछ  तुम कहो, कुछ हम कहे,

भूल जाओ किस ने क्या कहा 
कुछ हम मिले कुछ तुम मिलो,

किस को क्या मिला, अपने अहंकार से
कुछ तुम झूको , कुछ हम झुके,

कौन कब तक टिका, खुले आकाश में
कुछ सहारा तुम बनो, कुछ हम बने,

लापरवाहिया बहुत हैं इस सफर में 
कुछ परवाह तुम करो, कुछ हम करे 

मुश्किलो  मे साथ छोडना, आसान हैं ,
कुछ तुम रहो कुछ हम रहे,

कब तक नाराजगी का बोझ उठाओगे,
कुछ तुम हंसो कुछ हम हंसे 

बहुत आएंगे ये  कहने वो कहने वाले 
कुछ भरोसा तुम करो, कुछ कुछ हम करे 

हाँ  हम कुछ नाराजगी रखते हैं ,
कुछ तुम मनाओ, कुछ हम मनाए ॥ 



Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।