Friday, 28 July 2017

आज राजनीति मतलब ‘राज’ करने की ‘नीति’



बिहार के ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि आज के दौर की राजनीति में कोई सिद्धान्त नही हैं। आज राजनीति केवल ‘राज’ करने की ‘नीति’ तक सीमित हो गई है। सिद्धान्त का झुनझुना जनता को बहलाने का बस साधन भर है । 


राजनीति के पंडित आज नीतीश के कदम पर सवाल उठा रहे है, वो लोग तब ब्रह्मज्ञान से वंचित हो गए थे, जब बीजेपी के साथ 17 साल पुराने गठबंधन को तोड़, नीतिश कुमार ने  चिर प्रतिद्वंद्वी लालू यादव से गलबहियां कर आरजेडी से गठबंधन किया था। तब भी अवसरवादिता थी लेकिन तब राजनीतिक बुद्धिजीवियों को इस कदम में सिद्धांत और सेकुलरइज्म नजर आए थे, लेकिन आज कोरी अवसरवादिता। कुछ ने इस कदम को मास्टर स्ट्रोक बता नीतीश कुमार को राजनीति का माहिर करार दिया। जब हमारी सोच में ही सिद्धांत और सच्चाई नहीं है जहां पर कथनी और करनी में अंतर रखने वाले को ही राजनीति में शातिर खिलाड़ी माना जाता है। तो बाकी बचा ही क्या है?

Tuesday, 25 July 2017

असफलता से सफलता की ओर



आज दुनिया पहले की तुलना में काफी बदल चुकी है। हर दिन के साथ, इसके बदलने की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है। बदलाव संसार का नियम भी है और जरूरत भी। उसी तरह, कुछ लोग किसी की सफलता और असफलता का पैमाना किसी एक हार जीत से लगाने लग जाते है। यही दबाव व्यक्ति को असफलता के बाद तोड़ने लग जाता है। कुछ इसे झेलने में कामयाब होते है तो कुछ टूट जाते है। बस, यही वक्त होता है अपने आप को सभालने का, अपने व्यक्तित्व में निखार लाने का। जब तक आप जीवन में असफलता का स्वाद नहीं चखते तब तक आप व्यक्तित्व की उस गहराई तक नहीं पहुंचते, जहां पर आप दूसरे व्यक्ति की सफलता की कद्र करना नहीं सीखते। यहीं, वह भावना है जो आप को जमीन से जोड़े रखती है। कोरी सफलता बिन डोर की पतंग जैसी होती है जो अच्छे समय की हवा में आसमान की बुलंदियों को छूती है लेकिन बूरे समय की शून्यता उसे क्षण भर में जमीन पर लाकर पटक देती है।

असफलता का अर्थ यह कभी नहीं होता कि आप काबिल नहीं है। बल्कि, हम इसे खुद जान सकते है कि असफलता हाथ क्यों लगी ?  इसका पहला तरीका यही है कि. क्या कार्यसिद्धी के लिए हमने पूरे मनोवेग से मेहनत की। दूसरा, जिसके लिए हम मेहनत कर रहे है क्या हम वह सच में चाहते है? तीसरा, जो लोग आपकी काबीलियत की जांच रहे हैं, क्या उनका काबिलीयत नापने का पैमाना ठीक है? तीसरा कारण आपको कुछ अटपटा सा लगा होगा। क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि आप असफल इसलिए हुए है कि आप काबिल नहीं हैं बल्कि यह भी हो सकता है कि सामने वाला आपको सही परख ही नहीं पाया हो।

अमिताभ बच्चन आज किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं लेकिन एक वक्त था कि उनकी लाख कोशिशों के बाद भी, उन्हें जीवन में कई बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। उनमें से ही एक किस्सा है, जब वह ऑल इंडिया रेडियों पर काम के सिलसिले में गए लेकिन असफल हो गए। एक साक्षात्कार के दौरान उन्होंने यह माना भी कि वह तीन बार रेडियो उद्घोषक बनने के लिए ऑल इंडिया रेडियो गए लेकिन कामयाब नहीं हो सके। अगर दूसरे पहलू को देखें तो यह अच्छा ही हुआ, नहीं तो, फिल्म जगत को एक मेगा स्टार से वंचित रहना पड़ता।

इसलिए हम कह सकते है कि असफलता कई बार आपको गढ़ती है, तराशती है और निखारती है जो सफलता के लिए जरूरी है। दूसरे शब्दों में, असफलता कई बार आपको सफलता की और लेकर जाती है। बशर्ते कोशिश जारी रहनी चाहिए।


  

Tuesday, 11 July 2017

अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला


अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकी हमले ने एक बात तो तय कर दी है कि अब हमले की कड़ी निंदा करने का समय निकल गया है बल्कि कड़े फैसले लेने का समय आ गया है। आए दिन हो रहे आंतकी हमलों मे मरते जवानों से भारतीय जनता का सब्र अब टूट रहा है। विपक्ष में रहते हुए पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने का ख्वाब देखने वाले अब क्यों सिर्फ कड़ी निंदा कर, हाथ पर हाथ रख कर बैठ जाते है।

Sunday, 9 July 2017

गुरू बिन ज्ञान नहीं


गुरू बिन ज्ञान नहीं, गुरू बिन ध्यान नहीं,
गुरू बिन सही-गलत की पहचान नहीं,
गुरू घर भेद नही, गुरू से विच्छेद नहीं,
गुरू एक आस है, गुरु विश्वास है,
गुरू रक्षक है, गुरू मार्गदर्शक है,
गुरू-शिष्य हर संबंध से खास है,
गुरू कड़ी धूप में शीतलता का एहसास है,
गुरू उर्जा पुंज है, गुरू विचार कुज है,
गुरू जीत का दांव है, गुरू डुबते की नाव है
गुरू एक कृतिक है, गुरू ही संस्कृति है
गुरू का कोई मेल नहीं, गुरू बनना कोई खेल नहीं।।