मैं पेशे से पत्रकार हूं इसलिए आज जब किसी पत्रकार की हत्या की खबर सुनता हूं तो मुझे ऐसे लगता है जैसे मेरे ऊपर ही हमला हुआ हो । गौरी लंकेश की हत्या जिसने भी की है, वह अपराधी है। उसे हर कीमत पर सजा मिलनी ही चाहिए। इसमें कोई दोराय नहीं है। किसी की हत्या को कोई भी भाषा या शब्दावली का इस्तेमाल कर न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। पत्रकार की अपनी विचारधारा हो सकती है। वह अपने आप को किसी भी विचारधारा के नजदीक पा सकता है। मेरी बोद्धिक क्षमता के अनुसार यह गलत नहीं है।
गलत यह है जब खबर देते या लिखते समय, खबरों में अपनी विचार धारा का मिश्रण किया जाए। गलत यह है- जब एक समुदाय की गलती को छुपा लिया जाए और दूसरे की गला फाड़ के चिल्लाया जाए। यह सब गलत है। पत्रकार का काम सत्य और तथ्य को सबके सामने रखना है। न्यायाधीश बनकर जजमेंट सुनाना नहीं।
मै पत्रकारों की जमात में नया हूं। मुझसे अभी बहुत गलती होती होगी। शायद आगे भी हो क्योंकि मैं इंसान हूं । गलती कर के ही सीखता हूं। कभी खुद की गलती से कभी दूसरे की गलती से। पर हां, सीखने की कोशिश जरूर करता हूं। लेकिन, कभी मैं जजमेंट नहीं सुनाता। जैसे इस हत्या के बाद सुनाया गया है। खैर पुलिस अभी भी जांच कर रही है। हत्या किसने की प्रारंभिक जांच में उन्हें नहीं पता। पर राहुल गांधी को पता है। बड़े टीवी चैनलो के कुछ बड़े पत्रकारों को भी पता है कि हत्या किसने की है।
