Wednesday, 23 November 2016

सीमा पर मरता सैनिक, एक परिवार उजड़ गया



सीमा पर मरता सैनिक, एक परिवार उजड़ गया,  
तुम कहते रहे, कडा जवाब, अब तक तुमने क्या किया,

कहां गई वो बाते, जो अब से पहले होती थी,  
जब चलती थी गोली सीमा पर,  तीखी बोली होती थी,

किसका डर और क्या है ड़र, ये आज हमें तुम बतलाओ,
इकोनॉमी के चक्कर में, तुम स्वाभिमान ना बेच आओ, 

खुली जंग का ऑर्डर दो, तोल-मोल की छोडो बात,
पाकिस्तान चीज ही क्या, उसको बताओ उसकी औकात,

माना की फासले, अभी तय करने रहते है,
तुम एक आवाज लगाओ, हम सबकुछ त्यागे बैठे है,

पर शर्त यही, कि अब की बार कोई कसर न छोड़ी जाए,
हम रहे या न रहे, पर दुश्मन जिंदा न जाए,

याद करो तुम प्रताप को, जो लड़ा अपने स्वाभिमान पे,
लडता-डटता खड़ा रहा, अमर हुआ अपनी आन पे,

हम तो फिर भी बहुत बड़े, वो क्या हमको मारेगा,
एक बार जो चिल्ला दे हम, ऑखो से आंसू झाडे़गा,

शांति के कबुतर बंद करो, उठा ले आओ तुम भी एक बाज
हम देख ही ले या तो वो हैं, या हम हैं आज ।।

Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।

Saturday, 5 November 2016

क्यों बैन हुआ एनडी टीवी ?



हिंदी के प्रमुख समाचार चैनल एनडी टीवी पर 9 नवम्बर की रात 12.01 बजे से 10 नवम्बर की रात 12.01 बजे तक प्रसारण पर रोक लगा दी हैं । इस दौरान एनडी टीवी देश भर में ऑफ एयर रहेगा। 

इसका फैसला संसदीय समिति ने लिया। जिसमें एनडी टीवी को 'टीवी केवल नेटवर्क नियम 1994' के उल्लघन का दोषी पाया गया। इस कानून के तहत कोई भी न्युज चैनल आतंकरोधी कार्रवाही का सीधा प्रसारण नहीं कर सकता। एक अखबार के मुताबिक समिति ने चैनल का प्रसारण 30 दिन के लिए रोकने का प्रताव दिया था। लेकिन मंत्रालय ने सांकेतिक रूप से सिर्फ एक दिन के लिए किया।

एनडी टीवी ने पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले की लाइव रिर्पोटिंग के दौरान एयरबेस के संवेदनशील स्थान आतंकियों से कितनी दूरी पर हैं, जानकारी दी। स्कूल, रिहायसी कॉलोनी, फ्यूल टैंक कहां पर हैं ?, मिग विमान कितनी दूर हैं ? जैसी संवैदनशील जानकारी आप प्रसारित कर रहे हैं जबकि आपको पता हैं अन्दर आंतकराधी ऑपरेशन चल रहा हैं। इसका इस्तेमाल आतंकी कर सकते हैं। आपने टीआरपी के लिए न केवल अन्दर स्तिथ रिहायशी कॉलोनी के लोगो का और स्कूल में पढने वाले बच्चों का जीवन खतरे में डाला बल्कि एयरबेस में कौनसी चीज कहां पर हैं, इसकी सूचना भी प्रसारित की।

ऐसा नहीं  एनडी टीवी ने ऐसा पहली बार किया हैं। 26 नवम्बर 2008 को मुम्बई हमले के दौरान भी ऐसा ही किया गया था। जिसमें लाइव रिपोर्टिंग के दौरान, कितने हेलिकॉप्टर दिल्ली से आए हैं। उसमें कितने कमांड़ो हैं। वह आतंकियों को रोकने के लिए, क्या-क्या कदम उठा रहे हैं। इसकी मिनट-दर-मिनट रिपोर्टिगं की।

इसलिए जो लोग आज गला फाड-फाड कर लोकतंत्र खतरे में है, का रोना रो रहे हैं। उन्हें तब याद नहीं आया कि इस तरह की रिपोर्टिग से न केवल सुरक्षा बलो का बल्कि वहां मौजूद अन्य लोगो का जीवन भी खतरे में पढ जाता हैं 

यह देश की कोई पहली घटना नहीं हैं। जिसमें किसी चैनल को बैन किया हैं। 2005 से 2013 तक 20 चैनलों को ऑफ एयर किया गया। इसमें ज्यादातर को अश्लील सामग्री दिखाने  के लिए प्रतिबंधित किया।
2007 से 2010 के दौरान फैशन टीवी के प्रसारण पर 3 बार प्रतिबन्ध लगाया। अश्लील सामग्री दिखाने पर  प्रथम बार इस चैनल पर 2  माह के लिए प्रसारण पर रोक लगी। 2015 में अल जजीरा को भी 5 दिन के लिए बैन कर दिया क्योंकि उसने भारत का गलत नक्शा दिखाय़ा था।

इसलिए जो लोग लोकतंत्र का हवाला दे रहे हैं। उन्हे यह समझना होगा कि जब लोग सुरक्षित होगें तो लोकतंत्र भी सुरक्षित होगा। लोकतंत्र या बोलने की आजादी की आड़ में लोगों की और राष्ट्र की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं करने दिया जा सकता। 

कुछ को यह भी समझना होगा, एनडी टीवी का मतलब लोकतंत्र और लोकतंत्र का मतलब एनडी टीवी नही हैं। समाचार चैनलों को आलोचना करना ही नहीं झेलना भी आना चाहिए। 
#ndtv banned 

Thursday, 3 November 2016

मुझे हिंदी बोलने में होता है गर्व का अनुभव






मैं एक भारतीय हूं और हिंदी बोलने में मुझे गर्व होता हैं। किसी अंग्रेज को हिंदी बोलते सुनता हूं तो दिल को बहुत सुकून महसूस होता है। मुझे अंग्रेजी की भी समझ है। इसके बावजूद मुझसे अंग्रेजी में व्याकरण की भी हो जाती हैं क्योंकि 95 प्रतिशत मैं अपनी मातृ भाषा में ही बात करता हूं, उसी को पढता हूं। हिंदी का पत्रकार होने के चलते यह मेरे पेशे का हिस्सा भी है। इसलिए अंग्रेजी में गलती होने पर मुझे कोई शर्म भी नही आती, हालांकि मैं सुधार का पक्षधर हूं। हां, मुझे शर्म तब आती हैं, जब मैं हिंदी के किसी शब्द का अर्थ नहीं जानता या किसी भारतीय को यह कहते सुनता हूं कि मुझे हिन्दी थोड़ी कम आती हैं और यह कहते हुए वह गर्व से सीना चौडा कर लेता हैं।

हिन्दी हमारी 
मातृ भाषा हैं। इसे बोलने में पढने में गर्व का अनुभव होना चाहिए। मां कैसी भी हो बच्चे के लिए सबसे अच्छी और खुबसूरत होती हैं। इसलिए हमें गर्व से सिर उठा कर कहना चाहिेए कि हम हिन्दी बोल सकते हैं और हमें इसका गर्व हैं। क्योंकि व्याकरण की दृष्टि से भी और शब्द भंडार के मामले में भी यह अंग्रेजी से कोसो आगे हैं। सम्मान सभी भाषा का करो लेकिन अभिमान अपनी मातृ भाषा का ही होना चाहिए।                                       
जय हिन्द जय भारत