दुनिया में
राजा
हो
या
रंक,
सभी
भगवान
की सेवा के लिए
तत्पर
रहते
हैं।
अगर उन्हे ही सफाई की जिम्मेदारी दे दि जाए। सुनने में कुछ अटपटा सा
लगता है लेकिन यह सत्य
हैं।
इसका
प्रमाण
आपको
‘नोएडा 15’ मेट्रो स्टेशन के पास
बने
मैट्रो
के
पिलर
पर मिल जाएगा।
मोदी प्रधानमंत्री
बने
तो
उन्होंने
घोषणा
की
कि
2019 में, गाँधी जी
की
150वी जयंती पर उन्हें
स्वच्छ
भारत
तौफे
के
तौर
पर
देंगे।
लेकिन यह अभियान
एक
फोटो
के
अवसर
तक
ही
सीमित
रह
गया।
हम इस
बात
से
तो
वाकिफ
हैं
ही
कि
जो
काम
दुनिया
में
कोई
नही
कर
सकता,
उसके
लिए
हम
भगवान
के
आगे
माथा
टेकते
हैं,
परन्तु
इस
बार
मामला
थोडा
उल्टा
हैं।
ना
इस
बार
पूजा-अर्चना
की,
ना
फूल
चढाए
बल्कि
भगवान
को
सफाई
के
नाम
पर
मैट्रो
के
खम्भो
के
चारो
और
तस्वीरों
का
रूप
में
चिपका
दिया। मजे वाली
बात
यह
कि
जिन
खम्भो
पर
उनकी
तस्वीरे
लगी
हैं।
वहां-
वहां
अब
कोई
थूकता
नही
हैं,
न
ही
कोई
उसे
पेशाब
घर
बनाता
हैं।
जहां
पर
ये
मैट्रो
के
पिलर
मौजूद
हैं
वही
पर
दो
बडी
कम्पंनियो
के
कार्यालय
भी
हैं।
भारत
पेट्रोलियम
में
कार्यरत
गार्ड
महेशचन्द्र
से
जब
मैने
इस
विषय
में
बात
की,
तो
उसने
बताया
कि
इन
तस्वीरो
से
पहले
इन
खम्भो
का
बुरा
हाल
था।
पान-गुटके
की
पीक
से
खम्भे
रंगे
रहते
थे।
कुडा-करकट
खम्भो
की
शान
था
और
बदबू
कुडे
के
साथ
मिले
रूंगे
के
समान
मुफ्त
मिलती
थी।
खैर भगवान
ने
अपना
मोर्चा
सही
सम्भाला
हुआ
हैं।
उनके
सामने
किसी
की
मजाल
ही
क्या
कि
वह
खम्भो
को
उनके
पुराने
दौर
में
ले
जाए।
यह
जिम्मेदारी
केवल
अकेले
हिन्दू
भगवान
ने
नही
ली
बल्कि
हिन्दू,
मुस्लिम,
सिख,
ईसाई
सभी
धर्मो
के
ईश्वर
अपनी
जिम्मेदारी
मिलजुलकर
निभा
रहे
हैं।
देखा जाए
तो
ये
खम्भे
स्वच्छता
के लिए, इस्तेमाल हुए फोर्मुले की मिसाल
बन सकते हैं। वह कहावत
तो सुनी होगी आपने- हिंग लगे ना फिटकरी रंग चौखा आवे। य़ानी बिना किसी ताम झाम के और किसी की मदद लिए बगैर आप इस नुस्के का
इस्तेमाल कर सकते हैं। जहां भी आप गन्दगी देखे और साफ करने की तमाम
कोशिश नाकाम हो जाए। तब इसको अपनाना चाहिए। सफलता जरुर मिलेगी।
एक बात
ओर
गौर
करने
वाली
हैं।
लोग
शासन-प्रशासऩ
से
डरे
या
ना
डरे
भगवान
से
आज
भी
डरते
हैं।
शायद
इसलिए
हमारे
पूर्वजो
ने
गलत
कार्य
को
पाप
की
श्रेणी में
रखा
था
और
अच्छे
कार्य
को
पुण्य
में।

