Connect With Me
Tab Buttons
Tuesday, 28 November 2017
रोहित के सवाल पर बवाल क्यों ?
Thursday, 7 September 2017
गौरी लंकेश की हत्या...
गलत यह है जब खबर देते या लिखते समय, खबरों में अपनी विचार धारा का मिश्रण किया जाए। गलत यह है- जब एक समुदाय की गलती को छुपा लिया जाए और दूसरे की गला फाड़ के चिल्लाया जाए। यह सब गलत है। पत्रकार का काम सत्य और तथ्य को सबके सामने रखना है। न्यायाधीश बनकर जजमेंट सुनाना नहीं।
मै पत्रकारों की जमात में नया हूं। मुझसे अभी बहुत गलती होती होगी। शायद आगे भी हो क्योंकि मैं इंसान हूं । गलती कर के ही सीखता हूं। कभी खुद की गलती से कभी दूसरे की गलती से। पर हां, सीखने की कोशिश जरूर करता हूं। लेकिन, कभी मैं जजमेंट नहीं सुनाता। जैसे इस हत्या के बाद सुनाया गया है। खैर पुलिस अभी भी जांच कर रही है। हत्या किसने की प्रारंभिक जांच में उन्हें नहीं पता। पर राहुल गांधी को पता है। बड़े टीवी चैनलो के कुछ बड़े पत्रकारों को भी पता है कि हत्या किसने की है।
Friday, 28 July 2017
आज राजनीति मतलब ‘राज’ करने की ‘नीति’
Tuesday, 25 July 2017
असफलता से सफलता की ओर
Tuesday, 11 July 2017
अमरनाथ यात्रियों पर आतंकी हमला
Sunday, 9 July 2017
गुरू बिन ज्ञान नहीं
गुरू रक्षक है, गुरू मार्गदर्शक है,
Tuesday, 20 June 2017
नारों में सिमटा ‘बेटी पढ़ाओं बेटी बचाओं’ अभियान
Sunday, 18 June 2017
पापा मैं अब बड़ा हो गया हूं
मै आप जैसा हूं या आप हो गया हूं,
सब लोग बोलते है बाप पर गया है
आप को लगता है, मैं आप पर गया हूं
मेरी नादानियों के मौन गवाह हैं आप,
जानते हुए भी अंजान हैं आप,
कितनी ही मुश्किलों से लड़ा हूं मैं,
जानता था कि पीछे खड़े हैं आप,
मैं कितना सीखा हूं आप से,
ये भूल जाता हूं,
मैं अब इतना बड़ा हो गया हूं कि,
आप को सिखाता हूं,
कई शब्द चुभते होंगे मेरे,
सच कहूं, मैं बाद में पछताता हूं।।
Saturday, 10 June 2017
कहीं किसान मरा
Sunday, 28 May 2017
आंदोलन का ट्रेंड़
Saturday, 27 May 2017
कूड़े में भविष्य तलाशता बचपन...
Wednesday, 24 May 2017
शब्बीरपुर हिंसा के पीछे का सच
महाराणा प्रताप की जयंती मनाने के लिए 5 मई
को शब्बीरपुर के 20-25 युवक तेज आवाज में गाना बजाते हुए, पास के ही शिमलाना गांव जा रहे थे। शब्बीरपुर गांव के प्रधान ने तेज आवाज
पर आपत्ति जताई व अपने साथियों समेत उसे रोकने की कोशिश की साथ ही पुलिस को इस बाबत सूचना दे दी। प्रधान का
कहना था कि कार्यक्रम के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं
ली गई थी। गांव का प्रधान अनुसूचित जाति का है। एसएसपी सुभाष चन्द्र दुबे के
मुताबिक पुलिस ने मौके पर पहुंच कर डिजे बंद करवाया व उन्हें शिमलाना गांव के लिए
रवाना करने लगे। इसी दौरान कार्यक्रम में जाते लोगों (राजपूतों) पर छतों के
ऊपर से दलित समुदाय के लोगों ने पथराव शुरू कर दिया । जिसमें राजपूत समुदाय के 16
लोग घायल हो गये व सुमित सिंह नाम के 27 वर्षिय राजपूत युवक की मौत हो गई। इसकी
सूचना जब शिमलाना कार्यक्रम में मौजूद राजपूतों को पता चली तो वह बड़ी संख्या में
आए और उन्होंने दलित समुदाय 15-20 घेरों ( वह स्थान जहां पर भुस व पिटौड़ा आदि रखे जाते हैं) में पथराव और
आगजनी की। तभी से दोनों समुदाय के बीज तनाव की स्थिति बनी हुई है।
डीएम नागेंद्र व एसएसपी सुभाष चंद्र दुबे ने
बताया कि 9 मई को भीम आर्मी नाम के दलित संगठन ने सहारनपुर के गांधी पार्क में
बिना अनुमति के 5 मई की घटना के खिलाफ महापंचायत का आयोजन रखा। जब पुलिस बिना
अनुमति के हो रहे आयोजन को रोकने पहुंची तो वे लोग उग्र हो गए। उन्होंने वाहनो और
पुलिस पर पथराव शुरु कर दिया, जिसमें ड़ेढ़ दर्जन बाइक, दो बसे, तीन कारें जलकर खाक हो गई। बस में मौजूद 46 यात्रियों ने किसी तरह अपनी
जान बचाई। यात्रियों के मुताबिक 8-10 नकाबपोश लोगों ने इस घटना को अंजाम दिया।
एसपी सिटी और पत्रकारों पर भी हमला किया गया।
21 मई को हालात का जायजा लेने बसपा सुप्रीमो
मायावती भी सहारनपुर के शब्बीरपुर व और चन्द्रपुरा पहुंची लेकिन उनके पहुंचने से
पहले ही चंद्रपुरा के दलितों ने राजपूतों के घर पर पथराव व आगजनी की। उसके बाद
राजपूतों ने भी अपनी तलवारें निकाल ली। हालात एक बार फिर तनाव पूर्ण बन गए।
5 मई के बाद से एक के बाद एक हुई घटनाक्रम पर
नजर डाली जाए तो यह एक बढ़ी राजनीतिक साजिश लगती है। भीम आर्मी की भूमिका भी संदिग्थ है। भीम आर्मी के मुखिया चन्द्रशेखर आजाद ने एक ऑडियो रिलीज किया
जिसमें अपने सभी दलित भाईयों को 21 मई को जंतर-मंतर पर इकठ्ठा होने का आह्वान
किया। इस ऑडियो क्लिप में वह अपने आपको ‘एडवोकेट चन्द्रशेखर आजाद रावण’ कहता है। इसके बाद ‘नीला सलाम’ कहकर ऑडियो खत्म करता है। नीला सलाम ‘लाल सलाम’ से बहुत मेल खाता है। अपने नाम के साथ ‘रावण’ जोड़ना और हक की लडाई की बात करते हुए नक्सल
आंदोलन को सही ठहराने की कोशिश करना और वामपंथियों संगठनों की तरफ से भीम आर्मी को
मिल रहे समर्थन से लगता है कि यह समाज को बांटने साजिश की जा रही है।
आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष
सुचेता डे ने आईएएनएस से कहा, “हमारी मांग है कि भीम
आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद पर लगाए गए आरोप वापस लिए जाएं और दलित
ग्रामीणों को निशाना बनाने वाले और उनके घरों को जलाने वाले तथाकथित ऊंची जाति के
लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।” जिस प्रकार इसमें भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी
(मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की छात्र इकाई ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन के सदस्य
विरोध-प्रदर्शन में सक्रिय हैं व आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के बयान आ रहे हैं
उससे दो समुदाय के बीच की खाई और बढ़ रही है।
अब आप सोच रहे होगे कि अभी कोई चुनाव भी
नहीं है तो इस में राजनीतिक साजिश का क्या औचित्य है? यही समझने वाली बात है- उत्तर प्रदेश में बसपा और सपा अपनी जमीन खोते जा
रहे है। बड़ी संख्या में मुस्लिम और दलित बीजेपी का रुख कर रहे हैं और अब वामपंथी
विचारधारा से भी अधिकतर युवाओं का मोह भंग हो रहा है और भाजपा को यूपी व देश के
अन्य भागों में स्वीकारा जा रहा हैं। वह विपक्ष के लिए खतरें की घंटी हैं। इसी से
पार पाने के लिए यह एक सोची समझी साजिश नजर आ रही है। अपने गिरते वोट बैंक और
भाजपा के बढ़ते कद से निजात पाने के लिए, अपने वोट बैंक को एकजुट करना आवश्यक था।
2019 में भाजपा के विजयरथ को रोकने के लिए और हिंदु समाज के एक वर्ग को सर्वण समाज
का ड़र दिखाकर काटना जरूरी था। दलित अस्मिता और अम्बेड़कर के नाम पर भीम आर्मी का
मुखिया जिस प्रकार केंद्र में मोदी और प्रदेश में योगी पर सवाल खड़े कर रहा है।
उसके अपने बयानों में मुस्लिम व दलितों की बात करना इस बात की पुष्टि करता है कि
यह कोई दलित आंदोलन नहीं बल्कि साजिश है। जिसका आज नहीं तो कल सच सामने आ जाएगा।
Tuesday, 23 May 2017
दोस्ती महज अफवाह है साहब
वरना,मिलने में कसर कोई बची नहीं,
जब छोड़ चुके थे साथ तेरा हम
ऐसी कोई कमी नहीं जो तुम्हें हम में मिली नहीं,
ऐसा भी नहीं की हमने बहुत चाहा तुमसे
Monday, 22 May 2017
अभी स्वच्छ दिल्ली दूर है...
जब तक सांस है मेरी, तब तक
Wednesday, 10 May 2017
एक कैफे ऐसा भी...
Saturday, 1 April 2017
अब गोबर गैस से चलेगी भारत में बस
Tuesday, 28 March 2017
वीर विक्रमादित्य
बड़े ही शर्म की बात है कि महाराज विक्रमदित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था
उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन , जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य…
बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी , जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।
आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमदित्य के कारण अस्तित्व में है अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे।
रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। विक्रमदित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे, उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमदित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है, हमारी संस्कृति बची हुई है
महाराज विक्रमदित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है। विक्रमदित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यपारी सोने के वजन से खरीदते थे भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमदित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमदित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।
हिन्दू कैलंडर भी विक्रमदित्य का स्थापित किया हुआ है-
आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथीयाँ , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है , वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।
कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे , विक्रमदित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे, न्याय , राज सब धर्मशास्त्र के नियमो पर चलता था विक्रमदित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है, जहाँ प्रजा धनि और धर्म पर चलने वाली थी।
पर बड़े दुःख की बात है की भारत के सबसे महानतम राजा के बारे में इतिहास भारत की जनता को शून्य ज्ञान देता है,
कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था
प्रतिलिपी...

















