होसले बुलंद रख, आशाए रख उची,
दुनिया जिसे असम्भव कहे, तू रट लगा उसी की,
दुनिया जिसे असम्भव कहे, तू रट लगा उसी की,
छोड़ दे सोचना, वक्त पर ये तू,
वो भी एक बार कह दे होसला तुझी को ----२
वो भी एक बार कह दे होसला तुझी को ----२
तू ना हारा हार से ये गांठ बाँध ले तू ,
विजय भी छुले चरण , एक बार जो ठान ले तू
विजय भी छुले चरण , एक बार जो ठान ले तू
दुनिया के फेर में फिरे सब,
दुनिया को फेर ले ये होसला रख,
दुनिया को फेर ले ये होसला रख,
कह दे सब से --२ नादान नहीं है तू
मंजिले है चारो और ये बात है तुझ में
ले एक दिशा और बढ़ चल तू,
भूल जा कल क्या होगा,
ले एक दिशा और बढ़ चल तू,
भूल जा कल क्या होगा,
वही होगा जो एक बार सोच ले तू
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Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।

3 comments:
Wow....nice thinking sir ji
Thank you
Most wlcm g
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