मित्रो इस कविता के माद्यम से जो मैंने महसूस किया था। वह कहने का मैंने प्रयास किया है | ये सब हर भारतीय ने कभी न कभी तो महसूस किया ही होगा के जो सरहद पर अपनी जान की बाज़ी लगा कर हमारी रक्षा करते है , उनके साथ हम क्या करते है। क्या हो जाता है हमारे देश के नेताओ को जब कोई शहीद होता है तो कितने पैसे हम उनको देते है ताकि उनके जाने के बाद उनका परिवार चैन से रहे। जब कोई खिलाडी जीत के आते है तो करोडो उनको बाटने लग जाते है, प्रतिस्पर्धा होने लग जाती के कोन कितना पैसा देता है। पर जब कोई शहीद होता है तो कहा चला जाता है इनका पैसा ? और भी काफी कहने का प्रयास किया है मैंने इसमें आशा करता हूँ आपको मेरा ये प्रयास पसंद आएगा ।
आज नम है आँख मेरी,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
आक्रोशित है मन मेरा,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
टिका है जिनके कंधो पर,
वही है अंतिम कंधो पर,
वही है अंतिम कंधो पर,
गुस्सा है ये मन में,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
बरसे है करोडो जिनपे,
सिर्फ पसीना बहाने पर,
सिर्फ पसीना बहाने पर,
बहा जिनका खून तरसे है,
उनकी दुनिया जिनके सहारे को,
उनकी दुनिया जिनके सहारे को,
आज नम है आँख मेरी,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
हो रहा प्रहार इन पर,
फिर भी चुप है कर्णधार इन पर,
फिर भी चुप है कर्णधार इन पर,
आज रोष है मुझे,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
क्या करू उठा लू हथियार
या किस से करू पुकार,
या किस से करू पुकार,
आज मै उलझन में हूँ,
मेरे देश की हालत पर,
मेरे देश की हालत पर,
लोकतंत्र के नाम पर राजतन्त्र है यंहा,
क्या अब भी संहू और चुप रहूँ मै,
मेरे देश की हालत पर ||
मेरे देश की हालत पर ||
Note - इस कविता से जुड़े सर्वाधिकार रवि प्रताप सिंह के पास हैं। बिना उनकी लिखित अनुमति के कविता के किसी भी हिस्से को उद्धृत नहीं किया जा सकता है। इस लेख के किसी भी हिस्से को अनधिकृत तरीके से उद्धृत किये जाने पर क़ानूनी कार्यवायी होगी।


1 comment:
great ...............
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