Thursday, 8 October 2015

शिक्षित चाहिए या साक्षर ?






ये सुन कर बहुत दुःख हुआ के एक बच्चे ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या करली क्योकि वह स्कूल की फीस नहीं दे सका। ये बहुत दुःख और शर्म की बात है कि जिस शिक्षक पर बच्चो के भविष्य का दारोमदार है। वो सिर्फ छात्र को इसलिए मारता है कि उसके पास देने के लिए पुरे पैसे नहीं है। जबकि वह 5000 दे चूका था और सिर्फ 1000 रुपए बाकि थे। ये बात सिर्फ यही ख़त्म नहीं होती और ये सिर्फ आत्महत्या का मामला ही नहीं है। ये मामला विद्यालयों में नियुक्त होने वाले शिक्षको का भी है। जिन बच्चो पर  देश का भविष्य टिका है उन्हें क्या बनाना है और वे क्या बन सकते है ये सब एक शिक्षक ही देखता है, परखता है क्योकि विध्यार्थी जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा वह विध्यालय में बिताता है इसलिए वो शिक्षक कितना शिक्षित है या वो सिर्फ साक्षर है और उसकी नियुक्ति का क्या प्रक्रिया है। हमे इस पर भी विचार करना चाहिए। हमे इसका हल हमारी प्राचीन शिक्षा पद्धति से मिलेगा। जहाँ राजा का लड़का हो या किसी गरीब किसान का या कोई ब्राह्मण सबको शिक्षा के लिए एक नियम थे। कोई बड़ा छोटा नहीं था और राजकुमार भी अपने शिक्षण काल में भिक्षा माग कर शिक्षा लेते थे। यह सब किस लिए था ताकि वह सब जीवन में आने वाली सभी कठिनाइयों का सामना कर सके बिना डरे बिना थके। और जीवन की कठिनाइयों को समझ सके तथा अपने शासन को उस गरीब आदमी की समस्याओ को समझते हुए चलाए। और एक अच्छा शासक बनने से पहले एक अच्छा इंसान बने।

पर इस घटना ने ये साबित कर दिया है की हमारी सोच शिक्षा से ज्यादा साक्षरता पर ध्यान दे रही है। इसलिए अंत में बस यही कहना चाहता हूँ कि साक्षरता जरुरी है पर शिक्षा उस से भी ज्यादा जरुरी है। और एक एसी प्रणाली विकसित की जाए जहाँ पर उन लोंगो को शिक्षक के रूप में चुना जाए जो साक्षर तो हो पर शिक्षित भी हो। तभी वे देश के भविष्य का निर्मार्ण कर सकते है।

क्या हमे यह नहीं सोचना चाहिए की अगर हम एक ऑफिसर सेना के लिए चुनते है तो उसके लिए भी एक विशेष प्रक्रिया है, क्योकि उसके ऊपर उसके नेत्रत्व में लड़ने वाले सिपाहियों का भविष्य होता है पर हम उस शिक्षक का ऐसा कोई नियुक्ति का सही तरीका नहीं खोज सके जिसके हाथ में देश का भविष्य है। आज कल कुछ निजी स्कूल अपने कुछ पैसे बचाने के लिए किसी को भी अपने पास शिक्षक रख लेते है जो कि विद्यार्थियों के लिए दुरभाग्य  है क्योकि वो वहा केवल अपना विषय पढने ही नहीं जाते बल्कि आने वाले जीवन के रहस्य को भी समझना चाहते है।

4 comments:

Anonymous said...

Great

Anonymous said...

Yes u r right , we have to make such a perfect slection format.....

Unknown said...

काश के आप जैसी सोच रखने वाले 10% लोग इस देश मे मिल जाये तो ये देश संवर जाये...

Unknown said...

true