Thursday, 8 October 2015

ईश्वर केसे करते है बुराई ( ISIS ) का अंत ?



जैसे चुम्बक और लोहे का रिश्ता होता है उसी तरह से आज के सन्दर्भ में ISIS और बुराई एक दुसरे के पूरक बन गये है। दुनिया भर के देशो से जवान लड़के लडकिया ISIS में शामिल हो रहे है और सभी देशो की सरकारों के चेहरे पर इसे देख कर चिंता की लकीरे आ गई है, जो कि मेरी समझ से परे है। कुछ विद्वान इसे ISIS का जादू मानते है और कहते है कि ISIS युवाओ का ब्रेन वाश कर रहा है और उन्हें पश्चिमी देशो के खिलाफ भड़का रहा है। लेकिन मेरी राय में “जंहा खड्डा होता है पानी वही भरता है” सनातन धर्मं में और उसके माने वालो में ये चार पक्तिय बहुत प्रसिद्ध है कि 

“ दया धर्म का मूल है, पाप मूल अभिमान, साईं दया न छाडिये जब तक घट में प्राण”

अर्थात दया ही धर्म का मूल आधार है जिस प्राणी के मन में दया है वही धर्म का पालन कर सकता है और पाप का मूल आधार अभिमान है और जिसके मन में अभिमान है वही पाप की जड़ है।
आज ISIS और इसके मानने वालो में यही अभिमान है कि वही उत्तम है उनसे श्रेष्ट कोई नहीं है और इसी अभिमान में चूर वे लोग मासूम बच्चो तक को नहीं छोड़ रहे, उनकी बेरहमी से हत्या कर रहे है।
हालकी दया सिखाई नहीं जा सकती यह मानव का मूल स्वभाव है और जिसमे ये मूल भावना नहीं है वह मानव नहीं हो सकता वह तो मानवीय रूप में राक्षस (असुर) है।
अब बात करते है जो युवा ISIS से जूड रहे है | हमे इस बारे में चिंतित होना चाहिए या नहीं तो मेरो ये व्यक्तिगत राय है कि नहीं होना चाहिए और इस सोच का इसका ठोस आधार है जो मैंने भगवान् श्री राम और भगवान् श्ररी कृष्ण से सीखा है |
जब भगवान् राम ने लंका पे चढाई की तो उन्होंने रावण को पूरा अवसर दिया की वह उसके समर्थक बन्धु बांधव को लंका में इकट्ठा कर सके ताकि भगवान् राम को जगह-जगह बुराई के अंत के लिए भटकना न पड़े और अंत में श्री राम ने रावण का अंत कर दिया जब रावण के समर्थक और सभी मानव द्रोही मारे गए।

उसी प्रकार भगवान् श्री कृष्ण ने जरासंध को युद्ध में बार बार हराने के बाद भी जिन्दा छोड़ दिया था ताकि वह अपने साथ और पापियों को इकट्ठा कर के लाये और भगवान उनका अंत कर दे। तो हमे धर्म से शिक्षा लेनी चाहिए की आज के समय में ISIS, रावण और जरासंध है जो दुनिया भर की विकर्त और असामाजिक तत्वों को अपनी और खीच रहा है, और हमारे समाज की गन्दी मानसिकता वाले लोगो को एक स्थान पर एकत्रित कर रहा है। जिनको मारना और सजा देना हमारे लिए अब आसान है। अगर ये लोग वहा नहीं जायेगे तो जन्हा रहेगे वहा असामाजिकता फैलायगे और बुराई को बढ़ावा देगे इन्हें ISIS में जाने देना चाहिए।
गुरु नानक देव जी ने भी यही कहा है। उनके इस प्रसंग से ये बात पूरी तरह से स्पष्ट हो जाएगी।
एक बार वे यात्रा करते हुए दो गावो से गुजरे एक को उन्होंने उजड़ने का श्राप दिया तो दुसरे को बसे रहने का आशीर्वाद। यह देख कर उनके शिष्य हैरान हो गए तो उन्होंने उन से पूछा गुरु जी जिन लोंगो ने आपकी खूब सेवा की और धर्म पर आधारित आचरण किया। उन्हें आपने उजड़ने का श्राप दे दिया और जिन्होंने आप का अपमान किया और धर्म युक्त आचरण भी नहीं किया उन्हें आप ने सदा बसे रहने का आशीर्वाद दे दिया क्यों ?

तब गुरु नानक देव जी ने कहा – बुराई अगर एक जगह रहे तो वह फैलती नहीं है और समाज के लिए यही उत्तम है और बुराई एक जगह ही सिमित रहनी चाहिए और अच्छाई जितनी फैलेगी उतना ही मानव का कल्याण है। तो अंत में यही कहुगा जितने भी लोग ISIS से जुड़े है या जुड़ना चाहते है उन्हें जुड़ने देना चाहिए क्योकि ISIS बुरी मानसिकता वालो के लिए एक चुम्बक है और जब वह जुड़ जाये तो उन्हें ख़त्म कर दे।  

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