7 जनवरी 2015 के चार्ली हेब्दो आतंकी हमले के बाद ये दूसरा बड़ा आतंकी हमला फ़्रांस पर हुआ है। जिसमे अभी तक 153 लोगो के मारे जाने की खबर है और ये आकडा बढ़ भी सकता है। फ्रांस के नेशनल स्टेडियम में फ्रांस और जर्मनी की बीच फूटबाल का मैच चल रहा था। उस वक़्त एक फिदायीन हमलावर ने अपने आपको स्टेडियम के बाहर उड़ा दिया इसमें लगभग 40 लोग मारे गए। उस दौरान स्टेडियम में फ्रांस के राष्ट्रपति और जमर्नी के विदेश मंत्री फ्रैंक वाल्टर भी मौजूद थे। जैसे की खबर है आतंकियों ने 7 जगह पर हमला किया। उनमे से एक बैटाकलां थिएटर में लोगो को बंधक बना कर मार डाला गया, तो कई जगह अंधाधुन्द गोलिया चलाई गई। अगर इन हमलो का पैटर्न देखे तो ये बिलकुल मुंबई हमलो के जैसे ही थे।
यह फ्रांस और पूरी दुनिया
के लिए एक बार फिर से रिमाइंडर है। जो लोग आतंकवाद को ख़त्म करना चाहते है वो सब एक
मंच पर आये। ये सोचे समझे बिना के वो किस धर्म के है, किस देश के है, या फिर किस महाद्वीप के है। आज पूरी दुनिया में आतंकवाद पनप रहा है रोज कितने ही लोग आतंक
की भेट चढ़ रहे है। पर हमे इस पर हमेशा एक ही बयान सुनने को मिलता है कि “हम
आतंकवाद से लड़ने की लिए कटिबद्ध है” पर हम ठोस कार्यवाही के नाम पर कुछ नहीं करते। सभी देश अपनी राजनेतिक प्रभुता और अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस विषय को गोण करते चले जाते है। आज इराक का जो हाल है उसमे
अमेरिका का बहुत बड़ा हाथ है, अलकायदा को किसने बड़ा बनया ये सब जानते है पर खुल कर
कोई नहीं बोलता। आतंकवाद के नाम पर अमेरिका हर साल अरबो रूपये पाकिस्तान को देता
है पर क्या करता है, पाकिस्तान उन पैसो से? ये भी किसी से छिपा नहीं है। आज चीन
पाकिस्तान को अपने फायदे के लिए मदद दे रहा है और वो ये सहायता अपने आर्थिक हितो
को साधने की लिए कर रहा है, जबकि चीन का एक प्रान्त शिनजियांग भी आतंकवाद की
चपेट से अछुता नहीं रहा। आज चीन भी वही गलती कर रहा है, जो वर्षो पहले पाकिस्तान और अमेरिका ने की थी, पर इसका नतीजा अमेरिका ने भी भुगता और पाकिस्तान की
स्थिति सबके सामने है।
हम क्या कर सकते है इन आतंकी घटनाओ को रोकने के लिए ?
आतंकवादी घटनाए होती रहती
है, और हम हमेशा इसको कोसते रहते है। पर इसके पीछे के मुख्य कारण को समझना होगा कौन
इन लोगो को आतंकवादी बनने को प्रेरित करता है। ऐसा क्या लालच है जो आतंकी इन
युवावो को देते है के वे आतंकी बनने और मरने और मारने के लिए तैयार हो जाते है। ये
हम सभी को सोचना पड़ेगा। सभी देशो को एक साथ आना चाहिए और अपने देश के सभी मुस्लिम
विद्वान लोगो को एक मंच पर लाये और कुरान के सही अर्थो को विश्व के सामने रखे और सभी देशो के कुछ ही पब्लिकेशन को छापने की इजाजत दे ताकि कोई भी इसे अपनी मर्जी से
न तो छाप सके और नहीं उसका अपनी मर्जी से अनुवाद कर सके। और सभी मदरसे बंद कर देने
चाहिए और धर्म केंद्र स्थापित किये जान चाहिए। जिसमे सभी धर्मो के लोग अपनी इच्छा
के अनुसार या अपने धर्म के अनुसार पढाई कर सके जैसे कोई कुरान पढना चाहता है तो
कुरान पढ़े, कोई बाइबल पढना चाहता है तो बाइबल पढ़े या कोई रामायण, गीता पढना चाहता
है तो वो पढ़े। इससे विभिन्न धर्मो के विद्वानों के बीच परस्पर सामजस्य और सोहाद्र
बढेगा और जो बच्चे वंहा से पढ़कर निकलेगे उनके बीच में भी दुसरे धर्म के सिद्धांत के प्रति आपसी सहमती बनेगी।
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