Tuesday, 17 November 2015

हिन्दू होना ही अपने आप में सेक्युलर होना है।


जिस तरह हमारे देश में खबरों के बीच में भेदभाव हो रहा है, और जिस तरह से हमारे बुद्धिजीवी सहिष्णुता और असहिष्णुता के मुददे को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर रहे है। उससे उन लोगो का तो भला हो सकता है, पर देश का बिलकुल नहीं। इससे हमारे देश की छवि बाहर के मुल्को में ख़राब हो रही है और जिस FDI की देश को जरूरत है उसमे रोड़ा अटक सकता है। जो हमारी अर्थव्यवस्था के लिए ठीक नहीं है।


 12 नवम्बर 2015 को जब देश गोवर्धन पूजा के बाद खुशिया मनाने में मगन था तो एक घटना मेरठ में घटी जिसपर हमारे धर्मनिरपेक्ष कहे जान वाले बुद्धिजीवी और हमारे मिडिया के धुरन्धरो का ध्यान नहीं गया। जब लोग गोवर्धन पूजा के बाद सैनी वाली गली में पटाखे जला रहे थे, तो वही से कुछ मुस्लिम समुदाय के लोग नमाज पढ़ कर वापिस आ रहे थे, तो मुस्लिम युवको ने उन्हें वंहा पटाखे जलाने से रोका तो इसी विषय को लेकर दोनों समुदायों के बीच में तनाव बढ़ गया और बात एक दुसरे पर पथराव तक पहुच गई। पुलिस ने आकर दोनों समुदायों के बीच समझोता कराया, पर मेरा सवाल यह है कि पुलिस ने वंहा उन मुस्लिम युवको पर कार्यवाही क्यों नहीं की ? जिन्होंने हिन्दुओ के धार्मिक कार्य में बाधा डाली और मेरा यह भी सवाल है के किसी भी बुद्धिजीवी ने इस असहिष्णुता पर कोई प्रश्नचिन्ह क्यों नहीं लगाया ? एसी ही एक घटना तब हुई जब कन्नौज में दुर्गा माता की मूर्ति के विसर्जन के समय मुस्लिम युवक के ऊपर गुलाल गिर गया तो उस मुस्लिम युवक ने महेश नाम के युवक को गोली मार कर हत्या कर दी, पर यह घटना किसी भी चैनल की ब्रेकिंग न्यूज़ नहीं बनी। जब दादरी में मरने वाले अखलाख को 45 लाख रुपये दिए जाते है जबकि उसका लड़का एयर फाॅर्स में है और उसके भाइयो को भी 5 5 लाख दिए जाते है,  पर इस केस में महेश को सिर्फ 10 लाख देने की घोषणा की जाती है जबकि यह गरीब रेहड़ी लगाने वाला था और इसके हत्यारे को गिरफ्तार करने में भी पुलिस ने आना कानी दिखाई। ऐसी ही असहिष्णुता पश्चमी बंगाल में देखी गई जब एक गाव में दुर्गा पूजा पर पाबंदी लगा दी गई।  जबकि गाव की  हिन्दू आबादी 60% है और 40% मुस्लिम आबादी है। फिर भी वंहा दुर्गा पूजा पर पाबन्दी लगा दी है। ऐसी ही अनेक घटनाए देश के कोने कोने में है, पर इन घटनाओ को प्रमुखता से किसी अखबार या चेंनलो पर दिखाया नहीं जाता और न ही इन विषयों को लेकर कोई प्राइम टाइम डिबेट होती है। 



अभी कुछ दिनों पहले एक लेख में अनिश कपूर ने  “हिन्दू तालिबान” शब्द इस्तेमाल किया और अपने लेख में उन्होंने हर वो बात कही जो भारत की छवि को धुमिल करती है। क्या अनिश कपूर इंग्लैंड के दंगो के बारे में भूल गए है। अनिश कपूर शायद भूल गए है कि वह मूल रूप से हिन्दू और हिन्दुस्तानी है। हिन्दू अगर आतंकवादी और असहिष्णु होता तो आज कोई भी अल्पसंख्यक समुदाय की जनसँख्या का प्रतिशत बढ़ता नहीं। यह यही दिखाता है के भारत के मूल निवासी कभी असहिष्णु नहीं है। लेकिन अगर हिन्दुओ की धार्मिक भावनाओ, उनकी सहिष्णुता की परीक्षा बार बार लोगे तो उनमे से ही आगे चल कर असहिष्णु लोग पैदा होगे जो अपने खिलाफ चलती इस साजिश का जवाब उसी भाषा में देंगे।
सेकुलर और सहिष्णु होना यह किसी देश के कानून पर नहीं, वंहा के के नागरिको पर निर्भर करता है। कानून में एक शब्द सेक्युलर जोड़ने से कोई देश सेक्युलर नहीं बन जाता, सेक्युलर बनता है वंहा के बहुसंख्यक समाज के सेक्युलर होने से क्योकि अगर वही सेक्युलर नहीं होगा तो यह एक शब्द के अलावा कुछ नहीं है जो सिर्फ कानून की किताबो तक सिमित रह जाएगा।

अंत में मै एक और मसले पर आपका ध्यान चाहुगा कि गाय हिन्दू धर्म में पूजनीय है और इसकी रक्षा के लिए धर्म ग्रंथो में अपने प्राणों तक का मोह भी न रखा जाए यंहा तक लिखा है। तो यह एक धार्मिक मामला है हिन्दुओ के लिए। इसलिए दुसरे समुदाय के लोगो को भी यह समझना होगा की खाने के लिए हिंदुस्तान में बहुत कुछ हमे प्रक्रति ने दिया है। इसलिए हमे भी दुसरे की भावनाओ का ध्यान रखना चाहिए। तभी सोहार्द पैदा होता है, और हिन्दू होना ही अपने आप में सहिष्णु होना है अन्यथा यहाँ दुसरे धर्मो का फलना फूलना संभव ही नहीं हो पाता।

#हिंदुस्तान में हिन्दुओ के साथ दोहरा रवैया.......

3 comments:

Unknown said...

Main bhi ek hindu hu magar Hamara Dharam kabhi yeh nahi sikhata ki kisi Dharam ka bura karo ya kaho. Yeh hamari hi kami hoti hai ki hum kaano suni par nahi balki logo suni par yakeen karte hai. Mediocre aadmi ko to do time ki roti ke laale pade hai aaj kal to phir in jalso me, maarcho mei jaane ka time kaise nikal jaata hai. Sabse badiya hai ki apne apne dharm ke padchinho par chalo. Agar kisi ke baare mei achi baat nahi bol sakte to bura bhi mat bolo. Isi baat ka Faayda Angrej udha gaye aur yahi baan ab Saale Neta use kar rahe hai. Be aware and Be an Minded Indian wisely.

partap rana said...

Yes

Ravi Pratap Singh said...
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