मणि शंकर
अय्यर पाकिस्तान में बैठकर दिए गए बयान से राजनीतिक गलियारों में तूफ़ान आ गया है।
बीजेपी और कांग्रेस के बीच वाकयुद्ध शुरू हो गया है पर बात यहाँ बीजेपी और काग्रेस
की नहीं है और न ही बात ये है के उन्होंने मोदी की बुराई की है। बात यह है की उन्होंने हमारे देश के प्रधान
मंत्री की न केवल बुराई की है बल्कि उन्हें प्रधानमंत्री पद से हटाने के लिए
पकिस्तान के टीवी पत्रकार को कह रहे है, वो ये बात तक भूल गए है के मोदी जी हमारे
देश के प्रधानमंत्री है और उन्हें देश की जनता ने चुना है। मणि शंकर अय्य्र्र जी
पाकिस्तान में जाकर कहते है, आप इन्हें हटा दीजिये और हमे ले के आजाइए अगर भारत पाकिस्तान
के बीच बात शरू करनी है। पहली बात मोदी जी अब देश के प्रधानमंत्री है। उनका अपमान
करना मतलब देश का अपमान करना है और आपको किसने हक दिया पाकिस्तान में जाकर ये सब
बोलने का। आप मोदी
जी की बुराई करने में ये सब भूल गए के अब आप भारत के हित पर चोट कर रहे है, आखिर
ये सब मोदी जी से इतना डरते क्यों है ? क्या इन्हें अपनी राजनीतिक जमींन छोटी पड़ रही है। अगर इसी तरह से ये
मुस्लिम तुस्टीकरण की निति पर चलते रहे तो देश को गृह युद्ध की तरफ धकेल देंगे।
ये tweet शकील
अहमद का 17 नवम्बर 2015 का है जो
अपने आप अपनी कहानी कह रहा है। कांग्रेस के ये नेता भूल गए है के अब तक इनकी जुबान
थकती नहीं थी, ये कहते हुए कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं होता क्योकि अब तक ये
अपराध मुस्लिम करते आये है। दुनिया में आज जितनी आतंकवादी गतिविदियो में मुस्लिम शामिल
है शायद ही कोइ ओर होगा। उसके बाद भी आतंक का कोई मजहब नहीं होता, मै इस बात से सहमत
हूँ, पर क्या हो जाता है ? उन सबको जब यही लोग हिन्दुओ को न केवल आतंकवादी कहते है
बल्कि ये "भगवा आतंकवाद", "हिन्दू तालिबान" जैसे शब्दों का भी इस्तेमाल
करते है ये उस भगवे का अपमान करते है जो हजारो सालो से इस देश के मूल निवासियों की
आस्था का प्रतिक है जो आधुनिक युग में एक क्रांति का प्रतिक था। यह वही भगवा है
जिसे पहन कर हमारे भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव हँसते हुए फासी पर
झूल गए, यह वही
भगवा है जिसने वीर शिवाजी की भुजाओं में बल दिया और भारत को स्वराज का सपना दिखाया,
यह वही भगवा है जो हमारे सिक्ख गुरूओ ने अपने तन पर सजाया, यह वही भगवा है जो हमे
ज्ञान देता है ध्यान देता है, हमे सोचने पर मजबूर करता के हम इस धरती पर क्यों आये
? क्या
हमारा कर्तव्य है इस मात्रभूमि के लिए ? यही वही भगवा है जो श्री राम ने पहना था
वनवास जाते हुए और अपने कर्तव्य की याद दिलाता रहा, यह वही भगवा है जो राम जी को मजबूर करता है कहने
के लिए की "जननी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़ कर है" और कुछ मुट्ठी भर
लोग इस की महानता इसकी पवित्रता पर सवाल उठाते हो, मुझे तो शर्म उन पर भी आती है जो हिन्दू होते हुए हिन्दुओ को ही आतंकवादी कहते है
शायद ये वर्णशंकर है जो अपने कुल,
धर्म, जाति और
देश के घाति होते है। क्या कभी आपने किसी मुस्लिम को मुस्लिम को आतंकवादी कहते हुए
सुना है वो पूरी दुनिया का ज्ञान आपके ऊपर उड़ेल देंगे और कहेगे कि इस वजह से ये
हुआ और उस वजह से वो हुआ पर ये नहीं कहेगे के हा ये आतकंवादी होते है और जो नहीं
है वो हो भी सकते है। दुनिया में अगर कही सहिष्णुता है तो वो है हिन्दुओ में। मैं
नहीं जानता क्यों कुछ मुट्टी भर तथकथित सेकुलर लोग हिन्दुओ को आतंकवादी बताने पर
लगे हुए है इन की सहनशीलता पर बार बार चोट करते है अगर हिन्दू सहनशील नहीं होता तो
दुनिया में बोद्ध, जैन, सिक्ख, पारसी आदि धर्मो को मानने
वाले इस धरती पर न होते और नहीं ये धर्म होते। ये हिन्दू धर्म ( सनातन धर्म ) की विशेषता
है की इसकी गोद में हर कोई पला बढ़ा और इसकी कुछ विशेषताओ को लेकर अपनी उन्नति करी
पर इसने किसी में दोष नहीं निकला जैसे माँ अपने बच्चे को अपना सबकुछ दे देती है पर
कभी शिकायत नहीं करती और बच्चा अपनी माँ से सीखी बातो को लेखर ही आगे बढ़ता है।
क्या भूल
गए मुस्लिम शासको को जिन्होंने हजारो मंदिर तोड़े लाखो करोडो हिन्दुओ को मारा और
लाखो को ही मुस्लिम धर्म में बदल दिया ? ये सब महान थे और एक मस्जिद के ढाचे के
टूटने पर इतना दर्द है के अब तक नहीं भुला जाता है ? तो फिर तुम हिन्दुओ से केसे
ये उम्मीद रख सकते हो ? पर फिर भी सब भूल कर वो तुम्हे गले लगे लगते है। 2002 पर इतना
दर्द है तो उस दर्द को भी महसूस करो जो बेगुनाह ट्रेन यात्रियों ने भोगा जब उन्हें
जिन्दा ही जला दिया गया। क्योकि एक्शन का
रिएक्शन तो होगा ही ये भी याद रखना पड़ेगा सभी को।कर्नाटक की कांग्रेस सरकार भूल गई टीपू सुलतान ने लाखो हिन्दुओ को मारा इस्लामिक राज कायम करने के लिए, पर कर्नाटका की कांग्रेस सरकार उसे नायक की तरह पेश कर रही है उसकी जयंती मनाई जा रही है पर एक इस देश में जब पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप का चरित्र पढाया जाता है तो विध्यालयो का भगवाकरण हो रहा है। सवाल पूछा जाता है कि महान कौन ? अकबर कि राणा प्रताप ? मुझे देख कर दुःख होता है इनकी मुस्लिम तुस्टीकरण देखकर, किसी भी व्यक्ति को महानता की संज्ञा उसके व्यक्तित्व और चरित्र को देख कर दी जाती हैं ये देख कर नहीं कि उसके पास जमीन का कितना बड़ा टुकड़ा है अगर यही बात है तो अकबर से महान हिटलर था।
इसके साथ
ही मै अपने लेखन को विराम देता देता हूँ नहीं तो मै अपने शब्दों की आज मर्यादा भूल
जाउगा क्योकि इन घटिया नेताओ की बयान बाजी ने मुझे अंदर तक आहात कर दिया इतने सहिष्णु
लोग होते हुए भी हिन्दुओ के लिए ऐसे शब्दों का इस्तेमाल मन को क्रोध से भर देता है।
मै यंहा ये भी कहता के हिन्दू कभी इस देश को तोड़ने के लिए कभी हथियार नहीं उठाएगा।


1 comment:
very true
Post a Comment